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सरकारी रकम की सफाई ! फर्जी मजदूरी, फर्जी पंजीयन-ग्राम पंचायत गगोरी में बड़े सिंडीकेट की बू

चित्रसेन घृतलहरे, vandebharatlivetvnews/समृद्ध भारत //ग्राम पंचायत गगोरी में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और मनरेगा के तहत गंभीर अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार एक हितग्राही के नाम पर गांव के ही दूसरे जॉब कार्डधारी का फर्जी पंजीयन कर मनरेगा की 90 दिवस मजदूरी निकाल ली गई। इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति ने अब तक आवास निर्माण शुरू भी नहीं किया, उसे भी कागजों में काम पूरा दिखाकर आठ माह पहले ही पूर्ण मजदूरी भुगतान कर दिया गया।नियमों के अनुसार मजदूरी तभी देय होती है जब आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति हो और हितग्राही स्वयं कार्य कर रहा हो, लेकिन गगोरी पंचायत में काम हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया, जो योजना के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह त्रुटि नहीं बल्कि योजनाबद्ध भ्रष्टाचार है, जिसमें रोजगार सहायक, सरपंच, सचिव और आवास मित्र की भूमिका संदेह के घेरे में है। कागजों में हाजिरी, पंजीयन और काम को पूरा दिखाकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया है।पूर्व के मामलों में कार्रवाई का उदाहरण यह पहला मामला नहीं है। प्रदेश के कई जिलों में ऐसे ही अनियमितताओं में आवास मित्र, रोजगार सहायक और पंचायत सचिवों को निलंबित/बर्खास्त किया जा चुका है। कई जनपद स्तर के अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर विभागीय कार्रवाई हुई है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है—
क्या गगोरी पंचायत के इस मामले में भी प्रशासन उतनी ही सख्ती दिखाएगा, या फिर दोषियों को संरक्षण देकर प्रकरण को दबा दिया जाएगा  


वर्जन (Version/Statement)
रोजगार सहायक द्वारिका साहू ने फर्जी जॉब कार्ड पंजीयन के संबंध में कहा—
“इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। पंजीयन जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा किया गया है।”
जब मजदूरी भुगतान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा—
“ऊपर के अधिकारियों के निर्देश पर कार्य किया गया है।”

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